जितनी ज्यादा शिकायत, उतनी कम गंभीरता: होटल कर्मचारियों की असली कहानी
अगर आप कभी होटल, बैंक या फिर किसी काउंटर पर काम कर चुके हैं, तो आपको वो ग्राहक जरूर याद होंगे जिनकी शिकायत करने की आदत किसी ओलंपिक खेल से कम नहीं लगती। इनकी शिकायतें इतनी निराली होती हैं कि सुनकर लगता है जैसे उन्होंने शिकायत करने में ही पीएचडी कर रखी हो। छोटी-छोटी बातों को लेकर ऐसी हाय-तौबा मचाते हैं, मानो उनके घर में भूकंप आ गया हो।