जब वकील की जिद पर फेक्स की बाढ़ आ गई: ऑफिस की एक मज़ेदार कहानी
दफ़्तर में रोज़ाना की जिम्मेदारियाँ वैसे तो बड़ी साधारण लगती हैं – रिपोर्ट बनाना, बिल भेजना, सरकारी कागज़ात निपटाना – लेकिन कभी-कभी इनमें ऐसा मसाला आ जाता है कि हँसी छूट जाए। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसमें एक वकील साहब की ‘तीसरी बार’ फेक्स भेजने की जिद ने पूरी ऑफिस टीम को गुदगुदा दिया।
सोचिए, आप बड़े मन से किसी का काम समय पर करें, बार-बार वही डॉक्यूमेंट भेजें और सामने वाला फिर भी “तीसरी बार भेजिए” लिखकर फेक्स भेज दे – ऐसे में कोई भी ‘रिपशिट’ (मतलब, गुस्से से लाल) हो जाएगा! लेकिन हमारे हीरो ने तो वकील साहब को ऐसा जवाब दिया कि पूरा इंटरनेट वाह-वाह कर उठा।
ऑफिस का रोज़मर्रा और अचानक आई फेक्स की बाढ़
हमारे किस्से के नायक, जो अमेरिका के किसी सरकारी विभाग में काम करते हैं, हर दिन सरकारी दस्तावेज़ और मेडिकल रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। उन्होंने बड़े गर्व से बताया कि किसी भी वकील या एजेंसी को माँगा गया बिल या रिपोर्ट उसी दिन या अगले दिन भेज देते हैं।
एक दिन पड़ोसी राज्य के वकील ने अपने क्लाइंट की मेडिकल रिपोर्ट माँगी। भाईसाहब ने तुरंत भेज दी। दो हफ्ते बाद वही वकील फिर से वही रिकॉर्ड माँगता है, तो फिर से फेक्स और पोस्ट से भेज दिए। तीसरी बार जब “यह तीसरी बार है” लिखा हुआ फेक्स आया, तो हमारे मित्र का धैर्य जवाब दे गया।
अब गुस्सा भी जायज़ था! उन्होंने तीनों बार भेजी गई रिपोर्ट्स को इकट्ठा किया, देखा तो 49 पेज़ बनते हैं। फिर क्या था – उसी बंडल को एक दिन में चार बार फेक्स कर डाला और तय कर लिया कि जब तक ऑफिस बंद नहीं होता, फेक्स की बारिश जारी रहेगी!
जब वकील और ऑफिस के बीच हो गई खींचतान
यहाँ कहानी में असली मज़ा आता है। Reddit पर इस पोस्ट के नीचे लोगों ने अपनी-अपनी राय दी। किसी ने लिखा – “शायद वकील साहब ने e-fax (ईमेल से फेक्स) चालू कर रखा है, आप उनके इनबॉक्स को ही जाम कर रहे हैं।” एक और मज़ेदार कमेंट था – “पहले के जमाने में कुछ लोग ब्लैक पेपर फेक्स कर के सामने वाले की मशीन का कचूमर निकाल देते थे!”
एक और ने चुटकी ली – “अगर फेक्स की लाइन का कनेक्शन ही गलत हो, तो बेचारे किसी बैंक के कस्टमर केयर पर मेडिकल रिपोर्ट पहुँच रही होगी!” भारत में भी तो अक्सर गलत नंबर डायल करने पर किसी किराना दुकान वाले को OTP चला जाता है, और वो बेचारा परेशान होकर कहता है – “भाईसाहब, ये आपका नंबर नहीं है!”
एक यूज़र ने तो सलाह भी दी कि – “इतनी बार फेक्स करने से अच्छा था, एक बार फोन करके कन्फर्म कर लेते कि वाकई डॉक्यूमेंट मिल गया या नहीं।” लेकिन हमारे हीरो का जवाब था – “वकील के लेटरहेड पर जो नंबर था, वही सही था। हमने तो काम पूरा किया!”
फेक्स युग की यादें और भारतीय दफ्तरों की तुलना
आजकल तो भारत में भी ज्यादातर सरकारी कामकाज डिजिटल हो रहा है, लेकिन कुछ विभागों में अभी भी फेक्स की धौंस चलती है। पुराने ज़माने में सरकारी दफ्तरों में फेक्स मशीन के आगे लाइन लगती थी – जैसे राशन की दुकान पर। और अगर कोई फेक्स गलती से दूसरे ऑफिस चला गया, तो घंटों बाद कहीं से फोन आता – “भाई, आपका पेपर हमारे पास आ गया है!”
Reddit पर एक कमेंट पढ़कर तो खूब हँसी आई – “हमारे ऑफिस में जब कोई फेक्स देखकर बोलता था कि ये तो तीसरी बार आ रहा है, तो हम कन्फर्म कर लेते कि कहीं कोई फ्रिज बेचने वाला परेशान तो नहीं हो रहा!” भारत में भी अक्सर सरकारी बाबू लोग फाइल दोबारा-तिबारा भेजने में माहिर होते हैं – ‘काम करना है तो दस बार भेज दो, कौन पूछ रहा है!’
दफ्तर की राजनीति और ‘मालिशियस कम्प्लायंस’ का मज़ा
इस किस्से में असली मज़ा ‘मालिशियस कम्प्लायंस’ (यानी जान-बूझकर नियम का पालन करके सामने वाले को चिढ़ाना) में है। हमारे ऑफिस कर्मचारी ने वकील की बार-बार की मांग को इतना सीरियसली ले लिया कि उनके फेक्स मशीन की ही छुट्टी कर दी। कमेंट सेक्शन में किसी ने लिखा – “फेक्स मशीन का पेपर खत्म हो गया होगा, सारे डॉक्यूमेंट मेमोरी में अटके पड़े होंगे, बेचारे वकील को पता भी नहीं चला!”
ऐसे किस्सों में ही दफ्तर की असली मस्ती है। कभी-कभी तो लगता है, वकील और सरकारी कर्मचारी के बीच की लड़ाई का कोई अंत ही नहीं। Reddit पर एक और दिलचस्प कमेंट था – “अगर फेक्स की जगह कोरियर-उल्लू भेज दिया जाए तो कैसा रहे?” इस पर सबने ठहाके लगाए – “वो तो सच में पंख फैला कर सबको हिला देगा!”
निष्कर्ष: आपके ऑफिस में भी ऐसे किस्से होते हैं?
तो दोस्तों, यह थी एक आम ऑफिस के रोज़मर्रा की अजीब, मगर मज़ेदार कहानी। आखिरकार, काम तो सभी करते हैं – लेकिन हर दफ्तर में ऐसे किस्से ज़रूर होते हैं, जो सालों तक कॉफी के प्याले और कैंटीन के गप्पों में ज़िंदा रहते हैं।
क्या आपके ऑफिस में भी कभी फेक्स, ईमेल या फाइल भेजने के चक्कर में ऐसा कुछ हुआ है? या किसी बाबू या अफसर ने आपको इसी तरह ‘मालिशियस कम्प्लायंस’ का स्वाद चखाया? अपने अनुभव कमेंट में ज़रूर लिखें – कौन जाने, अगली कहानी आपकी ही हो!
मूल रेडिट पोस्ट: Nasty FAX form a lawyer