मेरे पापा का ‘केविन’ अंदाज: जब ज़िंदगी खुद ही कॉमेडी शो बन जाए
क्या आपके घर में भी कोई ऐसा है, जिसे देखकर आप सोचते हैं, “हाय राम! ये किस दुनिया में रहते हैं?” अगर हाँ, तो यकीन मानिए, आप अकेले नहीं हैं। Reddit पर एक यूज़र ने अपने पिता की ऐसी-ऐसी हरकतें साझा की हैं, जिन्हें पढ़कर आपको अपने घर के ‘केविन’ याद आ जाएंगे—या शायद आप खुद को ही पहचान लें!
पापा का फितूर: जब आम बातें भी बनीं जटिल
बात शुरू होती है उनके एक विदेशी दोस्त से, जिसने शादी के कार्ड छपवाने के लिए पापा से पता देने की गुज़ारिश की। पापा ने बड़े ठाठ से हाँ कर दी। कार्ड छपकर आए, दोस्त ने उठाए नहीं, बिल आया, पापा ने देखा नहीं, वसूली एजेंसी आई, पापा ने फिर भी ध्यान नहीं दिया। आखिरकार, बेलिफ़ (सरकारी वसूली वाला) घर आ गया! जब बेटे ने पूछा—“ये क्या चल रहा है?”—पापा बोले, “अरे, कार्ड मेरे थोड़े ही हैं, जॉन के हैं!” बेटे ने कहा, “तो कार्ड वापस दे दो!” पापा ठठाकर बोले, “अरे, मैं तो बस रख रहा हूँ, मेरे थोड़े ही हैं!” वसूली करने वालों को ये सब नहीं पता, लेकिन पापा की जिद ऐसी कि मानो उनका कोई कसूर ही नहीं!
यही नहीं, पापा ने जितने भी बिज़नेस शुरू किए, सबमें घाटा ही घाटा। हर बार कोई नया साथी, हर बार नया धोखा। जब बेटे ने कहा—“पहले मुझे मिलवा दो, मैं देख लूंगा ठीक है या नहीं”—पापा ने साफ़ मना कर दिया, बोले, “धोखेबाज़ के माथे पर थोड़ी लिखा रहता है!”
रोज़मर्रा की छोटी-छोटी ‘केविन’ मूर्खताएँ
स्कूल का पास बनवाने जाना हो या फोटो चिपकानी हो—पापा को हर चीज़ का ‘अपना तरीका’ चाहिए। फोटो उस जगह चिपकाने को कहते जहाँ जगह ही नहीं, और काउंटर वाली मैडम समझाती हैं तब भी पापा ऐसे सिर हिलाते जैसे सब पता था।
उनकी ज़ुबान पर ‘मैंने कुछ गलत नहीं किया’ का जादू है। एक बार इंटरनेट का सस्ता ऑफर देख लिया—बस 5 यूरो महीना। सालभर बाद जब असली बिल तीन गुना निकल आया तो बोले, “ये सब धोखेबाज़ हैं!”
ऐसी ही मज़ेदार बात उनके दाँत साफ़ करने की आदत में भी दिखती है। OP ने बताया, COVID से पहले पापा को ये तक नहीं पता था कि सफाई और बीमारी का कुछ लेना-देना है। एक बार रेस्टोरेंट से निकलते ही सड़क के किनारे लगे पोस्टर से कागज फाड़कर दाँत साफ़ करने लग गए! जब समझाया कि इसमें गंदगी है, बोले—“कागज ज्यादा बढ़िया है!”
रिश्तों में उलझन, भरोसे में धोखा
पापा का रोमांस भी कम फिल्मी नहीं। पांच साल से नई पार्टनर, लेकिन उन्हें लगा बेटा पसंद नहीं करेगा तो पांच साल तक मिलवाया ही नहीं! जब रिश्तेदारों को बेटे की सैलरी की बात बताने की बारी आई, तो बेटे से वादा किया—“किसी को नहीं बताऊँगा।” लेकिन अगले ही दिन दोस्त को सारी डीटेल्स बताते हुए बेटे की जेब कटवा दी! जब पकड़े गए तो बोले—“अगर नहीं बताना तो मुझे मत बताओ!”
एक कमेंट करने वाले ने लिखा, “अगर आपको अपने पैसों का ध्यान रखना है तो ऐसे ‘केविन’ टाइप लोगों के लिए क़ानूनी अभिभावक नियुक्त किया जाना चाहिए।” OP ने जवाब दिया, “मैं भी यही चाहता हूँ, लेकिन पापा के कान में जूँ तक नहीं रेंगती। जैसे बचपन में बच्चों का दिमाग होता है, वैसा ही है!”
क्या करें ऐसे पिताओं का?
अब सवाल ये उठता है कि ऐसे ‘केविन’ पिताओं के साथ जिएं कैसे? एक तरफ़ उनकी मासूमियत, दूसरी तरफ़ हरकतें ऐसी कि सिर पकड़ लें! Reddit कम्युनिटी के कई लोगों ने सलाह दी कि ऐसे मामलों में क़ानूनी या वित्तीय देखरेख जरूरी है, वरना “ये तो घर बार सब बेच डालेंगे और उन्हें पता भी नहीं चलेगा!”
कई पाठकों ने ये भी माना कि ऐसे लोग बुरे नहीं, बस बहुत भोल-भाले या दुनिया से बेखबर होते हैं। एक ने लिखा, “अगर आप नहीं चाहते कि वो किसी को बताएँ, तो खुद ही उन्हें न बताइए!”—क्या खूब कहा है!
निष्कर्ष: आपके घर में भी हैं ऐसे ‘केविन’?
तो दोस्तों, ऐसे ‘केविन’ टाइप पिताओं के साथ जीना कभी-कभी कॉमेडी शो से कम नहीं होता। वो चाहे कार्ड की कहानी हो, इंटरनेट का ऑफर, या निजी बातें—हर बार कोई न कोई नया गुल खिलाते हैं।
क्या आपके घर में भी कोई ऐसा है? या आप खुद कभी-कभी ‘केविन’ बन जाते हैं? नीचे कमेंट में ज़रूर बताएँ! अगर ऐसी कहानियाँ और सुननी हैं, तो शेयर करें, लाइक करें और हँसते रहिए—क्योंकि ज़िंदगी में थोड़ा ‘केविनपन’ भी ज़रूरी है!
मूल रेडिट पोस्ट: My father is a Kevin (who desperately needs a live-in guardian)