जब बोर्ड ने पैसे बचाने की सोची, मैनेजर ने कर दी असली चालाकी
क्या आपने कभी ऑफिस की राजनीति के चक्कर में खुद को फंसते देखा है? या फिर वो दिन याद हैं जब आपके मेहनत का सारा श्रेय किसी और को मिल जाता था, और बॉस के चमचे आराम से कुर्सी पर विराजमान रहते थे? तो जनाब, आज की कहानी आपके दिल को छू भी सकती है और गुदगुदा भी सकती है!
यह किस्सा है एक छोटे से क्रिश्चियन चैरिटी संगठन का, जहाँ कोरोना के दौरान पैसों की तंगी आ गई थी। बोर्ड वालों ने सोचा – चलो, खर्चा कम किया जाए, और सीधा-सीधा दो मेहनती कर्मचारियों को निकाल दिया। अब सोचिए, जिनका असल में सारा काम चल रहा था, वही बाहर! और अंदर कौन बचा? पादरी की पत्नी (जो खुद ट्रस्टी बोर्ड की चेयर), चर्च के पुराने सदस्य, और एक सज्जन जिनके बच्चे थे – जिन्हें "नहीं निकाल सकते" का टैग लग गया था। अब असली खेल शुरू हुआ...