ये है मेरी नौकरी! हां, सच में मुझे इसके पैसे मिलते हैं!
क्या आपको कभी अपने घरवालों को समझाना पड़ा है कि “मैं कंप्यूटर पर बैठा हूं, इसका मतलब ये नहीं कि मैं फालतू हूं, असल में मुझे इसके पैसे मिलते हैं”? तो साहब, आज की कहानी कुछ ऐसी ही है, बस फर्क इतना है कि यहां लैपटॉप के साथ चक्का-गाड़ी और एंटेना भी जुड़े हैं! सोचिए, आप किसी ढाबे के पास अपनी गाड़ी के नीचे झांक रहे हों, लैपटॉप चला रहे हों और कोई भैया पूछ बैठे – “भाई, ये क्या जादू-टोना कर रहे हो?”