चाचा की जिद – “मुझे Outlook वैसा ही चाहिए जैसा था!” : एक देसी टेक सपोर्ट की कहानी
हमारे मोहल्ले में अगर किसी का कंप्यूटर या मोबाइल दिमाग खराब करने लगे, तो लोग सबसे पहले “इलाके के टेक एक्सपर्ट” को ही बुलाते हैं। अब ये एक्सपर्ट कोई आईटी इंजीनियर नहीं, बस वही लड़का-लड़की जो वाई-फाई रीस्टार्ट करना, प्रिंटर के ड्राइवर इंस्टॉल करना या WhatsApp की D.P. बदलना जानता हो।
ऐसी ही एक शाम मेरे पास कॉल आई – “बेटा, Outlook नहीं खुल रहा, आकर देख ले।” बुलावा था 80 साल के शर्मा चाचा का, जो कंप्यूटर और ईमेल को लेकर बड़े जिद्दी हैं। पुराने जमाने के सरकारी अफसर रहे हैं, तो आदत से मजबूर, सब कुछ “वैसा का वैसा” चाहिए।