पड़ोसी को अजीब समझता था, सच पता चला तो होश उड़ गए!
हमारे यहाँ एक कहावत है – “दूर के ढोल सुहावने।” कभी-कभी जो चीज़ दूर से सामान्य या हल्की-फुल्की लगती है, उसके भीतर की कहानी कुछ और ही होती है। ऐसा ही एक अनुभव मेरे साथ हुआ जब मैंने अपने नए पड़ोसी को लेकर मन में तरह-तरह के सवाल खड़े कर लिए। शुरू में तो मुझे लगा कि ये आदमी थोड़ा अजीब है, लेकिन जब सच्चाई सामने आई... बस, कहिए कि मेरी तो सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई!