होटल की रिसेप्शन पर जब पुरानी टिंडर डेट सामने आ गई!
कहानी की शुरुआत होती है सर्दियों की एक बर्फीली रात से, जब शहर में बर्फ़बारी इतनी ज़ोरदार थी कि ऑफिस जाना भी किसी जंग जीतने जैसा लग रहा था। ऐसे मौसम में हमारे यहां, जैसे कई दफ्तरों में होता है, बॉस ने स्टाफ को होटल में ही रुकने का इंतज़ाम कर दिया, ताकि ज़रूरत पड़ने पर सब मौके पर मौजूद रहें।
अब ठंडी रात, अकेलापन, और बोरियत – ऐसे में क्या करे कोई? तो जनाब, मोबाइल निकाला और टिंडर खोल लिया! आप समझ ही सकते हैं, आजकल के नौजवानों के लिए टिंडर किस्मत का पिटारा बन गया है – कभी दोस्ती, कभी प्यार, तो कभी बस वक्त गुजारने के लिए।