मेरे कमरे में कोई है!' — एक मोटल की रात और बेघर मेहमानों की सच्ची दास्तान
कहावत है, "जहाँ चार बर्तन होते हैं, वहाँ खटकने की आवाज़ तो आती ही है।" भारत में हम अक्सर सोचते हैं कि होटल या गेस्ट हाउस में काम करना आरामदायक होता होगा – एसी कमरा, कॉफी की चुस्की और मेहमानों के सलाम। लेकिन जनाब, असलियत इससे बिल्कुल उलट है! खासकर अगर आप किसी सस्ते, सड़क किनारे वाले मोटल में नाइट शिफ्ट पर तैनात हों, तो समझ लीजिए हर रात एक नई फिल्म शुरू होती है — कभी थ्रिलर, कभी हॉरर, तो कभी सीधा-सीधा तमाशा!