बीमा कंपनी की बेरुखी और एक कर्मचारी की इंसानियत: एक सच्ची कहानी
कहते हैं, "जहाँ चाह, वहाँ राह।" लेकिन अगर आप भारतीय दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं, तो जानते होंगे कि कई बार पूरी चाहत के बावजूद भी राह नहीं मिलती। सोचिए, अगर ज़िंदगी और मौत का सवाल हो और सिस्टम की लापरवाही हर उम्मीद को तोड़ रही हो! आज की कहानी एक ऐसे ही बीमा कर्मचारी की है, जिसने हर मुश्किल के बावजूद इंसानियत नहीं छोड़ी।