जब शिक्षकों ने ‘Teacher Voice’ वर्कशॉप को ही अपना हथियार बना लिया – एक मज़ेदार किस्सा
स्कूल में अगर आप कभी शिक्षक रहे हों या किसी दफ़्तर में काम किया हो, तो "प्रोफेशनल डिवेलपमेंट" यानी PD वर्कशॉप्स का दर्द शायद आपने भी झेला होगा। हर साल सत्र की शुरुआत में, जब असली में बच्चों की तैयारी करनी होती है, तब आधा हफ्ता ऐसे ही बेमतलब के सेशन में फँसा दिया जाता है। ऊपर से ये सेशन भी ऐसे होते हैं कि बोलने वाले खुद कभी ठीक से पढ़ाए ही नहीं, और अब बाकी सबको ज्ञान बाँटने आए हैं! ऐसा लगता है जैसे "ऊँट के मुँह में जीरा", और ऊपर से सबको वही घिसी-पिटी बातें सुननी पड़ती हैं।
"Teacher Voice" – नाम बड़ा, दर्शन छोटे
अब ज़रा सोचिए – हमारे यहाँ भी अक्सर कोई न कोई नया ‘इनिशिएटिव’ आ जाता है, जो हर बार भारी-भरकम नाम के साथ आता है, जैसे ‘सर्व शिक्षा अभियान’ या ‘शिक्षक सशक्तिकरण’। लेकिन अमेरिका के एक स्कूल में तो हद ही हो गई! वहाँ "Teacher Voice" नाम का एक वर्कशॉप शुरू हुआ। नाम सुनकर तो लगा कि शायद ये आवाज़ को सही ढंग से इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग होगी – जैसे हमारे यहाँ लोकगीत या नाटक की वर्कशॉप में होता है, लेकिन असल में ये था "शिक्षकों की आवाज़ को नीति निर्धारण में जगह दिलाना"।
तीन बार साल में सेशन – पहले, बीच में और आख़िर में। हर बार वही घिसा-पिटा फ़ॉर्मेट – पहले सर्वे भरवाओ कि आपको स्कूल में सुना जाता है या नहीं (ज़्यादातर जवाब – नहीं!), फिर इसी पर लंबा-चौड़ा भाषण कि आप भी आवाज़ उठाएँ, अपने लिए खड़े हों, वगैरह-वगैरह। मज़ेदार बात – खुद प्रिंसिपल और अधिकारी लोग मोबाइल या लैपटॉप में घुसे रहते, जैसे सरकारी दफ़्तरों में साहब लोग फाइलों में घुसे रहते हैं!
‘Teacher Voice’ का असली मतलब – सीखा मज़ाक में, काम आया असल में
धीरे-धीरे शिक्षकों को समझ आ गया कि ये वर्कशॉप सिर्फ़ टाइम पास है – ‘कागज पर खानापूर्ति’। तो एक दिन किसी ने मज़ाक में ग्रुप चैट में हैशटैग चला दिया – #teachervoice! फिर क्या था, सारे शिक्षक इसी हैशटैग का इस्तेमाल करने लगे, जैसे अपने यहाँ व्हाट्सऐप ग्रुप्स में "बड़े साहब का आदेश" वाली मीम्स चलती हैं।
इसी बीच, एक काउंसलर ने कैंडीज और स्नैक्स का डब्बा रख दिया – नाम दिया ‘Professional Development’। संदेश साफ़ था – असली PD यहीं है, बाकी सब दिखावा!
दूसरा सेशन आया, तो फिर वही पुराना ड्रामा। इस बार तो शिक्षक लोग सीधे अपनी असली तैयारी करने में लग गए – कोई नोट्स बना रहा, कोई परीक्षा की कॉपी जाँच रहा। तभी किसी ने मज़ाक-मजाक में एडमिन को ईमेल भेज दी – "हम अपनी #teachervoice का इस्तेमाल कर रहे हैं, कृपया ध्यान दें!" अब एडमिन भी समझ गए कि ये ड्रामा अब और नहीं चलेगा।
जब उल्टा पड़ गया ‘प्रशिक्षण’ का खेल
तीसरे वर्कशॉप सेशन से पहले ही एडमिन ने उसे पूरी तरह रद्द कर दिया। उस वक्त शिक्षकों को असली में अपनी क्लास की तैयारी का समय दे दिया गया। यही नहीं, अगले साल PD के नाम पर नई पहल शुरू हुई – इस बार असली शिक्षक ही एक दूसरे को काम की चीज़ें सिखा रहे थे। जैसे हमारे यहाँ कभी-कभी अनुभवी मास्टरजी या मिस मैडम खुद अपनी ट्रिक्स बाँटते हैं – "Google Classroom" कैसे इस्तेमाल करें, बच्चों को कैसे प्रैक्टिकल सिखाएँ वगैरह। और मज़े की बात – सबने माना कि ये असली में फायदेमंद था!
कम्युनिटी के मज़ेदार तजुर्बे और नसीहतें
रेडिट कम्युनिटी में कई लोगों ने अपने अनुभव बाँटे। एक ने लिखा, "तीन साल स्कूल में रहा, सबसे अच्छा PD वही था जब बाकी शिक्षकों से बातचीत होती थी। बाकी सब टाइम की बर्बादी!" कोई बोला, "बीस साल प्री-स्कूल पढ़ाया, बाहर के ज्यादातर ट्रेनर खुद कभी ठीक से शिक्षक रहे ही नहीं, असली ज्ञान तो हमारे जैसे शिक्षकों के पास है।" एक कमेंट तो बड़ा बढ़िया था – "जो खुद पढ़ा नहीं पाते, वही PD करवाने आ जाते हैं!"
एक ने तो सरकारी अफसरों की पोल खोल दी – "जैसे हमारे यहाँ इंस्पेक्टर होते हैं, जो खुद कभी काम नहीं कर पाए, वही अब बाकी सबको ज्ञान दे रहे हैं!"
और सबसे शानदार कमेंट – "जब खुद के लिए आवाज़ उठाने की ट्रेनिंग दी, और सच में शिक्षक लोग बोल पड़े, तो वही ट्रेनिंग बंद करनी पड़ी!"
निष्कर्ष – असली बदलाव तो अपने हौसले से आता है
इस किस्से से यही सीख मिलती है – जब कोई आपको कहे कि अपनी आवाज़ बुलंद करो, तो सिर्फ़ भाषण तक मत रुको, असल में खड़े हो जाओ! कभी-कभी वही मज़ाक, वही भीतरखाने की बात असली बदलाव की जड़ बन जाती है। और असली सीख – सबसे अच्छा ज्ञान तो अपने ही लोगों में है, बाहर के ‘एक्सपर्ट’ सिर्फ़ दिखावा करने आते हैं।
तो अगली बार अगर आपके स्कूल, कॉलेज या दफ़्तर में कोई बेकार वर्कशॉप हो, तो ‘Teacher Voice’ या ‘Employee Voice’ का तड़का जरूर लगाइए – क्या पता, बदलाव की शुरुआत आपसे ही हो!
आपके यहाँ भी ऐसी कोई दिलचस्प वर्कशॉप या ट्रेनिंग का तजुर्बा है? कमेंट में जरूर बताइए – आपकी कहानी भी अगली बार हमारी ‘Teacher Voice’ बन सकती है!
मूल रेडिट पोस्ट: Infuriating professional development workshops on using our 'Teacher Voice'? Don't mind if we do!