जब बॉस ने सरकारी नियमों का बनाया मजाक और बॉक्सकार को दिखा दी 'चांदनी
दफ्तर की जिंदगी में न जाने कितनी बार ऐसे बेवजह के नियम आ जाते हैं, जिनका सिर-पैर समझ नहीं आता। कभी-कभी लगता है, इन नियमों को बस लोगों को परेशान करने के लिए ही बनाया गया है। लेकिन जब ऐसे नियमों का सामना थोड़ा हटके अंदाज़ में किया जाए, तो कहानी सुनने में भी मज़ा आ जाता है। आज हम आपको ऐसी ही एक कहानी सुनाने वाले हैं, जिसमें एक फैक्ट्री के बॉस ने सरकारी नियम की धज्जियां उड़ाते हुए ऐसा कारनामा कर दिखाया कि पूरी टीम ठहाके लगाने लगी और ऑफिस की बोरियत पल भर में छू-मंतर हो गई।
नया नियम, पुरानी परेशानी
अब सोचिए, आपकी नौकरी है मालगाड़ी (Boxcar) में सामान लादने की। काम थोड़ा मेहनत वाला है, लेकिन हर दिन की अपनी रूटीन है। फैक्ट्री में नियम ये था कि सामान ट्रक में रखते वक्त खाली जगहों में गत्ते या कार्डबोर्ड के टुकड़े डालकर हर चीज़ को कसकर पैक करो, ताकि सफर में कुछ हिले-डुले नहीं। सब बढ़िया चल रहा था, तभी एक दिन ऊपर से आदेश आ गया – अब हर मालगाड़ी की पैकिंग के बाद, दरवाजा खोलकर उसकी फोटो खींचनी है, और वो फोटो एक सरकारी एजेंसी को भेजनी है।
कई बार सरकारी आदेश ऐसे आते हैं जैसे मम्मी कहती हैं – "खाना खा लो, वरना..."। वजह पूछो, तो कोई सीधी-सी बात नहीं मिलती। बॉस और उनके बॉस दोनों सोच में पड़ गए – "भई, फोटो तो सिर्फ दरवाजे के पास की आएगी, अंदर की सही हालत कैसे दिखेगी?" लेकिन नियम है तो मानना तो पड़ेगा ही!
बॉस की 'चांदनी' और सबकी हंसी
अब असली मजा तो तब आया जब बॉस के बॉस ने अपने 'जुगाड़ू' दिमाग का इस्तेमाल किया। जैसे ही पहली बॉक्सकार तैयार हुई, बॉस ने कैमरा पकड़ा और कहा – "रुको, फोटो लेने से पहले कुछ खास करना है।" और फिर जो किया, उसने पूरे दफ्तर को हंसी के समंदर में डुबो दिया। बॉस साहब ने सबके सामने पैंट उतारकर कैमरे की तरफ 'चांद' दिखा दिया – जी हां, अंग्रेज़ी में इसे 'मूनिंग' कहते हैं। और यही नहीं, पूरे दिन हर एक मालगाड़ी के साथ ऐसा ही किया। हर फोटो में बॉस साहब की 'चांदनी' चमक रही थी!
फोटो तो नियम के मुताबिक खींची गई, अंदर का हिस्सा दिख रहा था, लेकिन साथ में बॉस साहब का 'चांद' भी। आगे कंपनी ने उन्हें "जल्दी रिटायरमेंट" दे दिया, क्योंकि वो वैसे भी रिटायरमेंट के करीब थे। लेकिन उस दिन की सारी फोटोज़ वही थीं – मजबूरी में उन फोटोज़ को जमा करना पड़ा। मजेदार बात ये कि नियम के मुताबिक फोटो पूरी तरह सही थी, किसी भी सरकारी अफसर ने कोई आपत्ति नहीं जताई। अब इसमें गलती भी क्या निकालते – नियम तो पूरा हुआ!
कमेंट्स में छुपी जनता की मस्तियाँ
अब Reddit पर इस कहानी के नीचे कमेंट्स में भी लोग अपनी-अपनी मसालेदार राय देने लगे। एक यूज़र ने लिखा, "भई, ये तो कमाल की फोटोग्राफी है, हर फोटो में 'फुल मून' की स्पेशल लाइटिंग दे दी!" किसी और ने मस्ती में कह दिया, "कंपनी को शायद बॉस का 'मूनलाइटिंग' करना पसंद नहीं आया।"
एक और मजेदार कमेंट था – "इस बॉस की हिम्मत को सलाम! हर बॉक्सकार को 'किस' करते हुए अलविदा कहा – 'लो, ये लो बॉक्सकार, अब सरकारी बाबू खुद समझ जाएं!'" किसी ने तो यहां तक कह दिया, "अब से 'बॉक्सकार' मेरा नया पसंदीदा शब्द है!"
एक यूज़र ने बड़ी समझदारी से लिखा, "शायद ये नियम इसलिए था कि गाड़ी के अंदर की स्थिति रिकॉर्ड हो जाए, ताकि कहीं कोई गड़बड़ या तस्करी न हो।" यानी हर काम के पीछे कोई न कोई वजह जरूर होती है, बस कभी-कभी उसका तरीका बड़ा अजीब होता है।
नियमों की दुनिया में जुगाड़ का तड़का
हमारे देश में भी ऐसे सरकारी या कंपनी के नियम कम नहीं हैं, जिनके ऊपर हर कर्मचारी सिर खुजाता है। कभी ऑफिस में घड़ी देखकर चाय पीने का टाइम तय हो जाता है, तो कभी हर फाइल में तीन-तीन चालान लगाना पड़ता है। लेकिन ऐसे मौकों पर 'जुगाड़' का तड़का लग जाए, तो बोरियत भी हंसी में बदल जाती है। इस कहानी के बॉस की तरह, अगर आप भी कभी-कभी हल्का सा 'बगावत' कर दें (वैसे, पैंट उतारने की सलाह नहीं देंगे!), तो ऑफिस की एकरसता टूट जाती है।
निष्कर्ष: क्या आपको भी ऐसे नियमों से दो-चार होना पड़ा है?
कहानी से एक बात तो साफ हो गई – कभी-कभी नियमों का पालन करते हुए भी इंसान खुद को 'हीरो' बना सकता है, बस तरीका थोड़ा हटके होना चाहिए। तो दोस्तों, क्या आपके ऑफिस में भी कभी ऐसा कोई नियम आया है, जिसने आपको सिर खुजाने पर मजबूर कर दिया हो? या फिर आपने या आपके किसी साथी ने ऐसे नियमों का कोई मजेदार हल निकाला हो? नीचे कमेंट में जरूर बताएं – आपकी कहानी भी शायद अगले ब्लॉग में जगह बना ले!
क्या पता, अगली बार आपके ऑफिस में भी कोई 'फुल मून' दिखा दे!
मूल रेडिट पोस्ट: My old boss used to work at a job where he loaded boxcars.