होटल की नौकरी में मौत से सामना: जब 'ड्यूटी' बन गई खतरे की घंटी
कहते हैं, रात के अंधेरे में होटल के रिसेप्शन पर बैठना चाय की प्याली नहीं, बल्कि शेर की सवारी है। भले ही बाहर से सब शांत दिखे, पर अंदर क्या तूफान छिपा है, किसे पता! आज की कहानी उसी तूफान की है, जिसमें एक साधारण रिसेप्शनिस्ट की ड्यूटी अचानक संघर्ष और मौत के डर में बदल गई।
कल्पना कीजिए – आप रात की शिफ्ट में हैं, होटल फुल है, सब मेहमान अपने-अपने कमरों में, और आपको लग रहा है "आज की रात तो बढ़िया कट जाएगी!" लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था...