होटल की लॉबी में ‘बेटा’ बना सिरदर्द: मैनेजमेंट की नीतियों का बुरा हाल
कभी-कभी नौकरी में ऐसे अनुभव मिल जाते हैं, जिन्हें सुनकर न हँसी आती है, न रोना। होटल की रिसेप्शन डेस्क पर बैठने वालों की ज़िंदगी बाहर से भले आसान लगे, मगर अंदर की कहानी कुछ और ही होती है। सोचिए, कोई अजनबी व्यक्ति रोज़ आपकी लॉबी में घुस आए, खुद को आपका बेटा बताने लगे और मैनेजमेंट कहे – “कोई बात नहीं, जब तक वो सो नहीं रहा, रहने दो!” बस, ऐसा ही किस्सा है आज की कहानी में।