पड़ोसी की ढिठाई और 300 डॉलर का सबक: मेरी पार्किंग, मेरा हक!
हमारे देश में तो मोहल्ले और पड़ोस का रिश्ता बड़ा ही अनोखा होता है। कभी त्योहार में मिठाई आती है, तो कभी बच्चों की शरारतों पर मिलकर डांट पड़ती है। लेकिन जब बात अपने हक की आ जाए, जैसे कि घर के बाहर की पार्किंग, तो मामला बड़ा दिलचस्प हो जाता है। आज की कहानी ऐसी ही एक जिद्दी पड़ोसी की है, जिसने "मेहमान-नवाज़ी" के नाम पर हद ही पार कर दी। लेकिन हमारी नर्स बहन ने भी उसे ऐसा सबक सिखाया कि पूरे मोहल्ले में उसकी चर्चा हो गई!