होटल के स्वागत काउंटर पर गुस्से में तौलिया महाराज: 'मुझे सब याद है!
कहते हैं, “अतिथि देवो भवः” — पर कभी-कभी अतिथि देवता नहीं, सीधे-सीधे परेशानी का पिटारा बन जाते हैं। होटल वाले भैया-बहन तो रोज़ ही किसी न किसी किस्से का हिस्सा बनते हैं, लेकिन आज जो कहानी आप पढ़ने जा रहे हैं, वो 'तौलियों' से शुरू होकर 'तर्कशास्त्र' के मैदान तक पहुंच गई!