जब मैनेजर ने कंपनी की नासमझी को 'मालिशियस कंप्लायंस' से सबक सिखाया
कहते हैं, "अक्ल बड़ी या भैंस?" ऑफिसों में तो अक्सर यही सवाल घूमता रहता है। बड़े-बड़े मैनेजर जब सिर्फ कागज़ों और एक्सेल शीट्स पर फैसले लेते हैं, तो ज़मीन की सच्चाई कुछ और ही होती है। आज की कहानी एक ऐसे अनुभवी प्रोग्रामर और मैनेजर की है, जिसने कंपनी के ऊल-जुलूल फैसले का जवाब अपनी ही स्टाइल में दिया – और वो भी कंपनी को सबक सिखाते हुए, सैलरी बढ़वाते हुए!