जब मास्टरजी ने छात्रों को दिखाया 'पेटी रिटायरमेंट' का असली मतलब
स्कूल की घंटी बजी, बच्चे भागते-झूमते क्लास में घुसे और मास्टरजी—जिन्हें सब आदर से ‘सर’ कहते हैं—अपनी कुर्सी पर बैठकर मुस्कुरा दिए। लेकिन इस बार उनके चेहरे पर कुछ अलग था। शायद सुकून, शायद हल्की सी शरारत, या फिर दोनों। आखिर, तीन दशक की मेहनत के बाद, मास्टरजी ने जो फैसला लिया, वो आम नहीं था—उन्होंने "पेटी रिटायरमेंट" ले ली!
अब भला ये पेटी रिटायरमेंट क्या बला है? और हमारे मास्टरजी ने ऐसा क्यों किया? चलिए, आपको सुनाते हैं ये दिलचस्प दास्तान, जिसमें मिर्च-मसाला, तड़का और देसी मसखरी सब कुछ है!