सुरक्षा के नाम पर चेकलिस्ट का तमाशा: जब नियमों ने काम रोक दिया
कौन कहता है दफ्तरों में बस चाय-सुट्टा ही गपशप होती है? कई बार पुराने साथी मिलें तो ऐसी-ऐसी यादें निकलती हैं कि हँसी के साथ सोचने पर भी मजबूर कर देती हैं। हाल ही में एक पुराने साथी के अंतिम संस्कार के बाद जब हम सब जमा हुए, तो यादों का पिटारा खुल गया। उन्हीं में से एक किस्सा, जो दफ्तर की 'सुरक्षा' और 'कागजी खानापूर्ति' पर तगड़ा कटाक्ष है, आज आपके लिए लाया हूँ।