अखबारों की खोज में 2025: होटल में आज भी क्यों माँगते हैं लोग पेपर?
क्या आपको याद है जब हर सुबह चाय के साथ अखबार पढ़ना हमारी दिनचर्या का हिस्सा हुआ करता था? उस ताज़े छपे कागज़ की खुशबू, संपादकीय पढ़ कर बहस करने का जोश, और परिवार में सबसे पहले सुडोकू या राशिफल हल करने की होड़! अब 2025 में, जब मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप हर हाथ में हैं, तो भी कुछ लोग हैं जो होटल में पहुँचते ही रिसेप्शन पर सवाल कर बैठते हैं – "भाईसाहब, आज का अखबार मिलेगा क्या?"