जब ऑनलाइन होटल बुकिंग ने बना दी रात की नींद हराम – एक फ्रंट डेस्क कर्मी की मजेदार कहानी
कभी-कभी होटल में काम करना वैसा ही होता है जैसे आप रेलवे स्टेशन पर टिकट का इंतजार कर रहे हों और अचानक पता चले कि आपकी ट्रेन ही गायब है! आज मैं आपको ऐसी ही एक होटल की विचित्र और हंसी से भरपूर कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो साबित करती है कि ‘तीसरे पक्ष की बुकिंग’ यानी थर्ड पार्टी रिजर्वेशन का खेल बड़ा ही लाजवाब है।
सोचिए, आप होटल के रिसेप्शन पर अपनी शिफ्ट के आखिरी तीन घंटे गिन रहे हैं, बस अब जल्दी घर पहुंचकर नींद के मजे लेंगे। तभी दो ठेकेदार भाई साहब आते हैं, चेहरे पर थकावट और उम्मीद दोनों। आते ही पूछते हैं – “Spanish?” भाई, मेरा डुएलिंगो स्पैनिश बस इतना ही चलता है कि हाउसकीपिंग को ‘नमस्ते’ बोल सकूं या बता सकूं कि कौन सा कमरा ‘स्टे ओवर’ है। खैर, असली मज़ा तो इसके बाद शुरू हुआ।