होटल फ़्रंट डेस्क की जंग: 'भाईसाहब, आप तो बहुत भारी हो!' और मेहमानों की फरमाइशों की बौछार
अगर आप कभी होटल में रुके हैं, तो ज़रा सोचिए, वहां के फ़्रंट डेस्क वाले भाईसाहब या दीदी की हालत कैसी रहती होगी? आपके लिए सफेद मुस्कान, मीठी आवाज़ और हर समय मदद को तैयार, लेकिन उनके दिल में क्या चलता है, ये कहानी सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे।
आज हम आपको लेकर चलेंगे एक ऐसे होटल के फ़्रंट डेस्क पर, जहाँ गर्मी की छुट्टियों में मेहमानों की फरमाइशों की बर्फ़बारी हो रही है। और हमारे प्यारे कर्मचारी का धैर्य, जैसे किसी पुराने सरकारी फ़ाइल की तरह, बार-बार चिपक कर उलझता जा रहा है!