दादाजी, स्नैक्स और अटारी: बचपन की शरारत और मीठा बदला
बचपन के वो दिन, जब जेब में कुछ पैसे हों, मोहल्ले की गलियों में घूमना हो और दादी के हाथ का खाना मिले – ऐसे लम्हे हर किसी के दिल के बहुत करीब होते हैं। पर सोचिए, अगर इसी बचपन की मासूमियत में कोई आपसे आपकी सबसे प्यारी चीज़ – यानी आपकी स्नैक्स वाली पर्स ही छीन ले! क्या करेंगे आप? आज की कहानी ऐसी ही है, जिसमें एक छह साल के बच्चे की मासूमियत, उसके शरारती भाई-बहनों की चालाकी और दादाजी के अनोखे बदले की झलक है।