जब रेस्तरां के मैनेजर ने 'चुप रहो और जैसा कहूं वैसा करो' कहा... फिर जो हुआ वो यादगार बन गया!
किसी भी छोटे शहर के परिवारिक रेस्तरां में काम करना अपने आप में एक अलग ही अनुभव होता है। वहां की "हम सब एक परिवार हैं" वाली भावना सुनने में तो बड़ी प्यारी लगती है, लेकिन जब सच्चाई सामने आती है, तो कई बार लगता है कि ये परिवार नहीं बल्कि किसी बॉलीवुड फिल्म का नाटकीय ससुराल है! आज मैं आपको एक ऐसी ही मजेदार और गुदगुदाने वाली घटना सुनाने जा रहा हूँ, जिसमें मैनेजर की सख्ती, असिस्टेंट मैनेजर की मनमानी और कर्मचारियों की जुगाड़ू सोच – सब कुछ भरपूर है।