जब मेहमान ने पैसे काउंटर पर फेंक दिए: होटल रिसेप्शन की मज़ेदार कहानी
कहते हैं, "अतिथि देवो भव:" लेकिन जब अतिथि खुद को देवता से भी ऊपर समझने लगे, तब क्या हो? होटल रिसेप्शन पर काम करने वालों की ज़िंदगी किसी टीवी सीरियल से कम नहीं होती—हर रोज़ नए-नए किरदार, नए नाटक। आज की हमारी कहानी एक ऐसे 'राजकुमार' मेहमान की है, जो स्टाइल और ऐटिट्यूड में बॉलीवुड के विलेन को भी मात दे दे!