जब सहकर्मी ने चाँद और सूरज में फर्क नहीं किया: दफ़्तर की हँसी-ठिठोली की कहानी
हमारे दफ़्तर में रोज़ कुछ न कुछ नया होता है, लेकिन कुछ किस्से ऐसे होते हैं जो सालों तक याद रहते हैं। एक सुबह की बात है, जब मैं अपने सहकर्मी—जिन्हें हम आज 'लेडी केविन' कह सकते हैं—के साथ दफ्तर जा रहा था। आसमान बिल्कुल साफ़ था, एक तरफ़ सूरज अपनी पूरी चमक बिखेर रहा था, और दूसरी ओर आधा निकला चाँद शरमाता सा दिख रहा था। तभी उन्होंने एक ऐसा सवाल पूछा कि मेरा तो दिमाग घूम गया!