सिनेमाघर में मोबाइल चलाने वाले को सबक – जब मनोरंजन में बाधा बनी स्क्रीन की रौशनी
हम भारतीयों के लिए फिल्म देखना कोई मामूली बात नहीं है। सिनेमाघर जाना मतलब पूरे हफ्ते की थकान मिटाना, दोस्तों-परिवार संग हँसी-मज़ाक, और सब कुछ भूलकर बड़े पर्दे की चमक में डूब जाना। लेकिन ज़रा सोचिए, जब पॉपकॉर्न के साथ फिल्म का मज़ा लेने बैठे हों और बगल वाला महाशय मोबाइल की रौशनी से पूरा माहौल ही खराब कर दें, तब क्या हाल होता है?