पड़ोसी की घास पर चलने का बदला या कूड़े के डिब्बों की जंग!
अरे भई, मोहल्ले की ज़िंदगी भी क्या कम दिलचस्प होती है! सुबह-सुबह टहलने निकलो, ताज़ी हवा लो, और कभी-कभी छोटे-मोटे झगड़े-झंझट भी मुफ्त मिल जाते हैं। सोचिए, अगर आपके रास्ते में हर दूसरे दिन कूड़े का डिब्बा मुंह बाए खड़ा हो जाए, और आपको मजबूरी में किसी की हरी-भरी घास पर पैर रखना पड़े – तो क्या करेंगे आप?