होटल की रिसेप्शन पर फैला 'घर का ड्रामा': न घर का, न होटल का!
कहते हैं, होटल में काम करना मतलब हर दिन नई कहानियों की किताब खोलना। आप सोचते हैं कि दिन बड़ा शांत बीत रहा है, अचानक ऐसा तूफान आता है कि 'कसम से, क्या ड्रामा था!' आज की कहानी भी ऐसी ही एक होटल रिसेप्शनिस्ट की है, जो बिना चाहे किसी के घरेलू झगड़े में घसीट लिया गया।
अब सोचिए, आप ऑफिस में बैठे हैं, काम कम है तो सोचा, चलो ज़रा बाथरूम हो आते हैं। ज्यों ही बाथरूम गए, बाहर कोई ज़रूरतमंद पहुंच गया! बाथरूम का पंखा ऐसा शोर मचाता है कि बाहर की आवाज़ तक सुनाई न दे। लेकिन जैसे-तैसे रिसेप्शनिस्ट को महसूस हुआ कि कोई ज़ोर-ज़ोर से किसी कर्मचारी को पुकार रहा है, यहाँ तक कि 'स्टाफ शीघ्र लौटेगा' वाला साइन भी अनदेखा कर दिया और दरवाज़ा पीटना शुरू!