होटल में मेहमानों की अकलमंदी! हर बार नहीं चलता जुगाड़
कहते हैं, "अतिथि देवो भवः" – लेकिन जब अतिथि अपना दिमाग घर छोड़कर आते हैं, तो देवता भी माथा पकड़ लेते हैं! होटल के रिसेप्शन पर काम करने वालों के लिए, हर दिन एक नई कहानी होती है। कभी किसी को कमरे में खाना चाहिए, कभी कोई ठंडा पानी मांगता है, और कभी-कभी तो कुछ ऐसे मेहमान आ जाते हैं, जो नियम-कानून को मजाक समझ लेते हैं। आज की कहानी ऐसे ही "अक्लमंद" मेहमानों की है, जिनकी हरकतें सुनकर आप भी कहेंगे – भाई, इतना भी मासूम मत बनो!