जब घास की गठरियों ने अकल ठिकाने लगा दी: एक देसी मज़ेदार कहानी
गाँव की ज़िंदगी में छोटे-छोटे किस्से भी कभी-कभी ज़िंदगी का बड़ा सबक सिखा जाते हैं। ऐसी ही एक रोचक, मज़ेदार और थोड़ी हास्यपूर्ण घटना आज आपके लिए लेकर आया हूँ, जिसमें एक अनुभवी महिला की ‘मैं जानती हूँ सब’ वाली सोच और एक नौजवान की मेहनत को टकराते देखना किसी देसी टीवी सीरियल से कम नहीं।
गर्मी का मौसम था, धूप आसमान से आग बरसा रही थी, और गाँव की गलियों में हल्की-सी सुगंध फैली थी – सूखी घास की। ऐसी ही दोपहर में शुरू होती है हमारी कहानी...