होटल में हंगामा: मेहमान का नाम न जोड़ना कैसे बना आफत की जड़
होटल में काम करना सुनने में जितना आसान लगता है, असलियत में उतना ही सिरदर्दी वाला हो सकता है। कभी-कभी तो ऐसा लगता है जैसे आप रिसेप्शन नहीं, कोई अदालत चला रहे हों! अब सोचिए, रात के 2 बजे कोई नशे में धुत्त साहब आकर कहें—“भाई, मेरी गर्लफ्रेंड 105 नंबर रूम में है, मुझे अंदर जाना है।” और जब आप रजिस्टर चेक करें, तो उनका नाम ही न मिले! ऐसी हालत में रिसेप्शन वाले की क्या दुर्गति होती होगी, ये तो सिर्फ वही समझ सकता है।