जब केक डेकोरेटर ने मैनेजर को चखाया असली 'मीठा' बदला!
सोचिए, आप छह साल से भी ज़्यादा समय तक एक बेकरी में जी-जान लगाकर काम कर रहे हों। हर त्योहार, हर जश्न में आपकी बनाई केक से सबका दिन बन जाता है। लेकिन जब मेहनत का असली सम्मान ही न मिले, तो दिल कैसे न टूटे! यही हुआ हमारी आज की नायिका के साथ।
एक तरफ़ थी उनकी मेहनत, दूसरी तरफ़ थी 'जिल'—उनकी बॉस, जो चाय की प्याली हाथ में लेकर आराम से चार दिन की छुट्टियां मनाती थी, और सारी जिम्मेदारी छोड़ देती थी उन्हीं के सिर। लेकिन कहते हैं न, "जिसका हक़ छीना जाए, उसका बदला भी मिठाई की तरह लाजवाब होता है!"