होटल में निर्माण कार्य और मेहमानों की जिद: 'मत जाओ' का मतलब आखिर समझ में क्यों नहीं आता?
कभी सोचा है, जब आपके घर में रंगाई-पुताई चल रही हो, तो दादी-नानी बार-बार उस ताज़ा रंगी दीवार पर हाथ क्यों लगा देती हैं? या फिर किसी शादी-ब्याह में “कृपया घास पर न चलें” का बोर्ड देखकर छोटे बच्चे और भी ज्यादा दौड़ने लगते हैं? यही आदतें जब होटल के मेहमानों में दिखें, तो मज़ा तो आता है, लेकिन रिसेप्शन वालों की हालत देखने लायक हो जाती है!
आज हम आपको लेकर चलते हैं एक ऐसे होटल की फ्रंट डेस्क पर, जहाँ ग्राउंड फ्लोर का निर्माण कार्य चल रहा है। दो प्लास्टिक की शीटें ज़िपर के साथ—बिल्कुल साफ-साफ “यहाँ मत आइए” का बोर्ड टंगा हुआ। फिर भी मेहमान... मानेंगे कहाँ!