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किस्सागो

होटल में निर्माण कार्य और मेहमानों की जिद: 'मत जाओ' का मतलब आखिर समझ में क्यों नहीं आता?

प्लास्टिक की चादरों और जिप्परों के साथ नवीनीकरण क्षेत्र, जो घर के सुधार के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र को दर्शाता है।
इस सिनेमाई शॉट में, नवीनीकरण क्षेत्र की स्पष्टता चल रहे काम को उजागर करती है, जहां प्लास्टिक की चादरें "प्रवेश ना करें" क्षेत्र बनाती हैं। बाधाओं के बावजूद, जिज्ञासु पासरबाई यहाँ से गुजरते हैं, हमारे घर के सुधार यात्रा में एक हास्य का स्पर्श जोड़ते हैं।

कभी सोचा है, जब आपके घर में रंगाई-पुताई चल रही हो, तो दादी-नानी बार-बार उस ताज़ा रंगी दीवार पर हाथ क्यों लगा देती हैं? या फिर किसी शादी-ब्याह में “कृपया घास पर न चलें” का बोर्ड देखकर छोटे बच्चे और भी ज्यादा दौड़ने लगते हैं? यही आदतें जब होटल के मेहमानों में दिखें, तो मज़ा तो आता है, लेकिन रिसेप्शन वालों की हालत देखने लायक हो जाती है!

आज हम आपको लेकर चलते हैं एक ऐसे होटल की फ्रंट डेस्क पर, जहाँ ग्राउंड फ्लोर का निर्माण कार्य चल रहा है। दो प्लास्टिक की शीटें ज़िपर के साथ—बिल्कुल साफ-साफ “यहाँ मत आइए” का बोर्ड टंगा हुआ। फिर भी मेहमान... मानेंगे कहाँ!

जब 'स्कोरबोर्ड' की ताना मस्ती पर एक Seahawks फैन ने दिया करारा जवाब

आइसलैंड की उत्तरी रोशनी का सिनेमाई दृश्य, जिसमें एक जोड़ा अपनी सर्दी की छुट्टी का आनंद ले रहा है।
जनवरी 2015 में हमारी अविस्मरणीय यात्रा के दौरान, मैंने और मेरे पति ने उत्तरी रोशनी के नीचे रोमांच का अनुभव किया। आइसलैंड की इस जादुई छवि का आनंद लें।

खेलों का जुनून हमारे देश में जितना है, उतना ही विदेशों में भी है। चाहे क्रिकेट हो या फुटबॉल, हर फैन अपने टीम के लिए दिल-जान लगा देता है। ऐसे में अगर कोई सामने से ताना मारे, तो अंदर का शेर जाग ही जाता है! आज की कहानी है एक ऐसी ही स्पोर्ट्स फैन की, जिसने एक विदेशी बार में अपने टीम की हार-जीत से बढ़कर, ताने मारने वाले को उसकी ही भाषा में जवाब दिया—वो भी बड़े मज़ेदार अंदाज़ में।

होटल स्टाफ की दुविधा: हर कहानी के पीछे छुपा होता है एक सच

बेघर मेहमानों के बारे में संकेत के साथ होटल का कार्टून-3डी चित्रण, सामुदायिक समस्या और जन प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
यह जीवंत कार्टून-3डी चित्रण होटल और उनके बेघर मेहमानों के प्रति व्यवहार पर चल रही गरमागरम बहस को दर्शाता है। यह स्थिति की जटिलता का प्रतीक है, पाठकों को मुख्यधारा की खबरों के पीछे की गहरी कहानी को खोजने के लिए आमंत्रित करता है।

कभी-कभी अखबारों या सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें पढ़ने को मिलती हैं कि "होटल ने बेघर लोगों को कमरा देने से मना कर दिया!" और फिर क्या, लोग गुस्से में ट्वीट करने लगते हैं – "कैसे पत्थर दिल हैं!", "इतनी ठंड में किसी को बाहर निकालना अमानवीय है!" सब अपने-अपने नैतिकता के तमगे लेकर मैदान में कूद जाते हैं। लेकिन क्या वाकई मामला इतना सीधा है? क्या होटल वाले सचमुच खलनायक हैं, या फिर कहानी में कुछ और है?

होटल के बद्तमीज़ मेहमानों को सबक सिखाने का पुराना देसी तरीका!

सिनेमाई शैली में प्री-ऑथराइजेशन के लिए पुराने होटल क्रेडिट कार्ड प्रोसेसिंग सिस्टम।
होटल प्रबंधन के अतीत की एक सिनेमाई झलक, जिसमें प्री-ऑथराइजेशन के लिए उपयोग होने वाली पुरानी क्रेडिट कार्ड प्रोसेसिंग मशीन को दर्शाया गया है। यह पुरानी मशीन सबसे चुनौतीपूर्ण मेहमानों को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। इसके पीछे की कहानियों को जानने के लिए हमारे नवीनतम ब्लॉग पोस्ट को पढ़ें!

होटल की नौकरी में दिन-रात न जाने कैसे-कैसे मेहमानों से पाला पड़ता है। कुछ तो इतने शराफ़त से रहते हैं कि दिल खुश हो जाए, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं कि बस... भगवान ही मालिक! आज एक ऐसी मज़ेदार कहानी लेकर आए हैं, जिसमें एक होटल कर्मचारी ने अपने पुराने ज़माने के जुगाड़ से बद्तमीज़ मेहमानों को ऐसा सबक सिखाया कि वो भी याद रखे।

ऑफिस की रोटा चालाकी: जब बॉस का आदेश बना फ्री टाइम का जुगाड़

हेडसेट पहने कॉल सेंटर कर्मचारी प्रशासनिक कार्यों के साथ संतुलन बनाते हुए, मल्टीटास्किंग की चुनौती को दर्शाते हुए।
इस सिनेमाई छवि में, हम एक समर्पित कॉल सेंटर कर्मचारी को प्रशासनिक जिम्मेदारियों और कॉल्स का प्रबंधन करते हुए देखते हैं, जो काम के दायित्वों का संतुलन बनाने की चुनौती को बेहतरीन तरीके से दर्शाता है। जानें कि कैसे एक रोटा अपनाने से अप्रत्याशित फुर्सत के समय का लाभ उठाया जा सकता है, हमारे नवीनतम ब्लॉग पोस्ट में!

आजकल की कॉरपोरेट दुनिया में, खासतौर पर कॉल सेंटर जैसी जगहों पर, हर चीज़ का टाइम टेबल—या जैसा कि अंग्रेज़ी में कहते हैं “रोटा”—बिलकुल सुस्पष्ट होता है। हर मिनट का हिसाब, हर काम की कोडिंग! ऐसे माहौल में अगर कोई थोड़ा-सा भी अपना दिमाग चला ले, तो समझिए मज़ा ही आ जाता है।

यह कहानी है एक ऐसे कर्मचारी की, जिसने अपने बॉस के आदेश को तो माना, लेकिन अपने ही तरीके से! और उसका तरीका जानकर आप भी कहेंगे—“बापू, ये तो बड़ा धांसू निकला!”

मैं तुम्हारे लिए जान दे दूंगा' – होटल के रिसेप्शन पर एक अजीब मेहमान की कहानी

दो सहकर्मियों की सिनेमाई छवि, ऑडिट शिफ्ट में, रहस्यमय वातावरण और मेहमानों के इंटरैक्शन के बीच।
डॉली और मेरे साथ ऑडिट शिफ्ट के रहस्यमय संसार में डूब जाएं, जहाँ हम अप्रत्याशित मेहमानों की मुलाकातों का सामना करते हैं। यह सिनेमाई दृश्य हमारी रोमांचक कहानियों की झलक दिखाता है, जो पर्दे के पीछे घटित होती हैं।

होटल की रिसेप्शन डेस्क पर काम करना जितना आसान दिखता है, असलियत में उतना ही चौंकाने वाला हो सकता है। यहाँ हर रात नए-नए किस्से तैयार होते हैं, जिनमें कभी-कभी हँसी आती है तो कभी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आज मैं आपको एक ऐसे मेहमान की कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जिसने 'अतिथि देवो भव:' की परिभाषा को ही बदल डाला।

नए मालिक, पुराना चाल – कर्मचारियों की कटौती और होटल की गजब कहानी

शहर के एक होटल का सिनेमाई दृश्य, कर्मचारियों की छंटनी और नए स्वामित्व की चुनौतियों का प्रतीक।
यह सिनेमाई छवि एक शहर के होटल की कठिन अवस्थाओं को दर्शाती है। नए स्वामित्व के तहत लागत में कटौती के साथ, कर्मचारियों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है, जबकि फ्रंट डेस्क टीम एक चुनौतीपूर्ण धीमे सीजन का सामना कर रही है।

आपने कभी सुना है कि किसी होटल ने पैसे बचाने के लिए अपने आदमियों की पूरी फौज ही निकाल दी हो? जी हां, यह कोई फिल्मी सीन नहीं है, बल्कि एक सच्ची घटना है। सोचिए, आप एक होटल में काम कर रहे हैं, मेहनत कर रहे हैं, बदलाव के वक्त दूसरों को ट्रेनिंग दे रहे हैं और अचानक आपको कहा जाता है – या तो 'ऑन कॉल' हो जाओ या नौकरी छोड़ दो! भैया, ऐसा झटका तो बिजली का भी नहीं लगता जितना इन नए मालिकों ने अपने कर्मचारियों को दे दिया।

जब प्रिंसिपल ने दिया मुफ्त में मेहनत का वादा, और छात्र ने रंग दी ऑफिस की दीवारें पिंक!

उज्ज्वल गुलाबी ऑफिस का दरवाजा, कलात्मक तत्वों के साथ, जो स्कूल में रचनात्मकता और छात्र पहलों का प्रतीक है।
इस जीवंत गुलाबी ऑफिस दरवाजे का सिनेमाई दृश्य, एक हाई स्कूल कला क्लब के अध्यक्ष की रचनात्मक भावना को दर्शाता है। यह साहसिक चयन एक नीरस स्थान को एक प्रेरणादायक वातावरण में बदलने का प्रतीक है, साथ ही कला के काम के लिए मुफ्त लंच भी अर्जित करता है।

स्कूल की यादें और मस्ती – दोनों साथ-साथ चलती हैं। लेकिन अगर आपको कभी लगा कि आपके स्कूल वाले आपसे मुफ्त में काम करवाते थे, तो जनाब, पढ़िए ये कहानी! इसमें है एक हाईस्कूल के आर्ट क्लब अध्यक्ष की ऐसी चतुराई, जिसे जानकर आप भी कहेंगे – “वाह भई, क्या बदला लिया है!”

मीटिंग्स जो सिर्फ ईमेल में हो सकती थीं: नाइट शिफ्ट कर्मचारियों की व्यथा

रात में ऑफिस जाते एक कर्मचारी के साथ बर्फीले माहौल में मीटिंग का कार्टून चित्रण।
यह जीवंत कार्टून-3डी चित्र रात की शिफ्ट में मीटिंग का अनूठा अनुभव दर्शाता है, जिसमें कर्मचारी बर्फीले हालातों का सामना करते हुए काम में योगदान देने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि ऑफिस की मीटिंग्स असल में कितनी ज़रूरी होती हैं? या फिर, क्या वे सिर्फ वक्त की बर्बादी हैं? खासकर जब आप रात की शिफ्ट में काम करते हों, और आपको अपने नींद के समय में मीटिंग के लिए बुला लिया जाए! आज की कहानी ठीक इसी मुद्दे पर है – और यकीन मानिए, इसमें आपको हंसी भी आएगी और कुछ कड़वी सच्चाई भी समझ आएगी।

वो दिन जब हमारी कंपनी ने ऐसी टेप भेजने वाली थी, जो हर कंप्यूटर को कर देती 'ध्वस्त'!

80 के दशक की ईडीए प्रयोगशाला का दृश्य, जहाँ इंजीनियर सर्किट बोर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर काम कर रहे हैं।
80 के दशक की ईडीए उद्योग की झलक, जहाँ इंजीनियर जटिल चुनौतियों का सामना करते थे, जिसमें सर्किट बोर्ड की प्लेसमेंट शामिल थी। यह फोटो यथार्थवादी छवि नवाचार की भावना और तकनीकी समर्थन की दुनिया की रोमांचकता को दर्शाती है।

दोस्तों, टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक छोटी सी गलती कब कहर मचा दे, कोई नहीं जानता। ऐसे ही एक किस्से ने मुझे चौंका दिया, जिसमें एक इंजीनियर की फुर्ती और ईमानदारी ने कंपनी की इज्जत भी बचाई और करोड़ों का नुकसान भी टल गया। सोचिए, अगर आपके ऑफिस में कोई ऐसी सीडी या टेप आ जाए, जो सिस्टम में डालते ही कंप्यूटर को “खटमल” बना दे — यानी चालू ही न हो! 80 के दशक की तकनीक में ऐसा हादसा हो जाता तो उस ज़माने की सरकारें भी हिल जातीं!