जब ‘कैश’ और ‘कार्ड’ एक ही बात हो जाए: होटल रिसेप्शन की मजेदार दास्तां
कभी-कभी लोग ऐसे-ऐसे सवाल कर देते हैं कि आप सोच में पड़ जाते हैं – “अरे भाई, ये किस दुनिया में रहते हैं?” होटल में रिसेप्शन पर बैठना वैसे भी आसान काम नहीं। ऊपर से अगर ग्राहक ही ‘जुगाड़ू’ निकले, तो मज़ा ही कुछ और है। एक बार की बात है, जब एक सज्जन आए और उन्होंने ‘कैश’ और ‘कार्ड’ को ऐसे मिलाकर पेश किया कि खुद बैंकों के बाबू भी चकरा जाएँ!