जब मेहमान की मुस्कान ने रिसेप्शनिस्ट का दिन बना दिया
हमारे देश में कहा जाता है – “अतिथि देवो भवः।” लेकिन सच पूछिए तो आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में, होटल या ऑफिस के रिसेप्शन पर बैठे लोगों को शायद ही कोई अतिथि भगवान जैसा बर्ताव करता हो। इनकी मुस्कान और सेवा को हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन सोचिए, अगर किसी ने आपके छोटे से प्रयास को दिल से सराहा हो, तो कैसा लगेगा? आज की कहानी है ऐसी ही एक शानदार मेहमान और रिसेप्शनिस्ट की, जिसने सबका दिल जीत लिया।