होटल के फ्रंट डेस्क वालों की मेहरबानी: एक मुसाफिर की दिलचस्प दास्तान
अगर आप भी कभी सफर पर निकले हैं, तो होटल में रुकने का तजुर्बा जरूर लिया होगा। वैसे तो घर की बात ही अलग है, लेकिन काम-काज या घूमने-फिरने के चक्कर में होटल का सहारा लेना ही पड़ता है। अब आप सोचिए, कोई रोज-रोज होटल में रुके, तो उसे कौन सी चीज सबसे ज्यादा याद रह जाती होगी? कमरे की साज-सज्जा, नाश्ते का मेन्यू या फिर वो मुस्कुराते हुए होटल के फ्रंट डेस्क वाले?
आज की कहानी एक ऐसे ही यात्री की है, जो खुद मानता है कि जितनी रातें उसने अपने बिस्तर पर नहीं बिताईं, उससे ज्यादा किसी होटल की छत के नीचे गुजारी हैं। और ब्रांड? वो जो 'M' से शुरू होकर 'tt' पर खत्म होता है—समझदार के लिए इशारा काफी है!