मैन्युअल या ब्रोशर पे भरोसा मत करो! टेक्निकल झोल और इंजीनियरों की पुरानी गलती
क्या आपने कभी किसी इलेक्ट्रॉनिक चीज़ के साथ ऐसा झेला है, कि मैन्युअल पढ़ो, ब्रोशर देखो, सब कुछ ठीक लगे – लेकिन फिर भी असली दुनिया में वह मशीन अपनी ही मर्ज़ी चलाए? भारत में तो हम अक्सर कहते हैं, "बाबूजी, मैन्युअल लिखने वाले ने खुद कभी इस्तेमाल किया है क्या?" आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
यह कहानी है एक टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर की, जिसे अपने AV (ऑडियो-वीडियो) सिस्टम में ऐसी गुत्थी सुलझानी पड़ी, कि बाल नोचने का मन कर जाए। लेकिन, इस किस्से में केवल तकनीकी झोल ही नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा और कॉर्पोरेट दुनिया के चटपटे ताने भी शामिल हैं।