जब ग्राहक को लगा उसने मोल-भाव में जीत ली, पर असल में घाटा कर बैठी!
हमारे देश में दुकानों पर मोल-भाव करना तो जैसे हमारी रग-रग में बसा है। “भैया, आख़िरी दाम बताओ!” या “इतना तो पीछे वाली दुकान में दे रहा था!” – ये बातें सुनकर दुकानदार भी मुस्कुरा देते हैं। लेकिन कभी-कभी ग्राहक अपनी ही होशियारी में ऐसा चक्कर चला देते हैं कि खुद ही फँस जाते हैं और दुकानदार मुस्कुराते रह जाते हैं।