जब आलसी साथियों ने खुद अपना जाल बुना: ग्रुप प्रोजेक्ट्स की मासूम बदला-कहानी
कॉलेज लाइफ में ग्रुप प्रोजेक्ट्स का नाम सुनते ही आधे लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें और बाकी के चेहरे पर ‘चलो किसी और के भरोसे छोड़ दो’ जैसी मुस्कान आ जाती है। आपने भी कभी न कभी ऐसे ग्रुप में जरूर काम किया होगा, जहाँ दो-तीन लोग सिर्फ नाम के लिए होते हैं और एक बेचारा सबका बोझ उठाता है। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, लेकिन इसमें ट्विस्ट है – यहाँ बदला भी है, मज़ा भी और सीख भी!