अंततः उस नौकरी को अलविदा, जिसने आत्मा तक चूस ली – होटल फ्रंट डेस्क की कहानी
आजकल नौकरी करना आसान नहीं है, लेकिन कुछ नौकरियाँ तो ऐसी होती हैं कि आदमी अपनी मुस्कान ही भूल जाता है। सोचिए, एक होटल में फ्रंट डेस्क पर काम करना – बाहर से भले ही बड़ा चमचमाता लगे, पर अंदर से... बस यही कहूँगा, “नाच न जाने आँगन टेढ़ा!” आज हम एक ऐसे ही कर्मचारी की कहानी सुनेंगे, जिसने दो साल तक होटल की नौकरी में अपनी आत्मा तक झोंक दी – और आखिरकार, खुद के लिए आवाज़ उठाई।