होटल की शिफ्ट बदलते ही बदल गई ज़िंदगी: मेरे सोमवार के मेहमानों की याद में
एक होटल के रिसेप्शन पर काम करने का अपना ही मज़ा है, लेकिन जब आप कॉलेज के साथ पार्ट टाइम जॉब कर रहे हों, तब ये मज़ा कई बार सिरदर्द भी बन जाता है। मैं पिछले छह महीने से एक होटल में काम कर रहा हूँ। मेरी शिफ्ट थी – वीकेंड की सुबह और सोमवार की रातें। इन दोनों शिफ्टों का मिज़ाज अलग-अलग था, लेकिन इन दोनों की अपनी-अपनी यादें थीं, अपने-अपने खास मेहमान।
होटल की दुनिया ऐसी है जैसे किसी चाय की दुकान के बाहर बैठकर रोज़ आने-जाने वालों को देखना। धीरे-धीरे कुछ चेहरे इतने अपने लगने लगते हैं कि वे मेहमान नहीं, परिवार से लगने लगते हैं।