मैंने पहले ही जवाब दे दिया है!'—ग्राहक सेवा की अजब-गजब शतरंज
अगर आप कभी होटल, बैंक या दवा दुकान की काउंटर पर गए हैं, तो एक बात पक्की है—आपने ऐसे किसी न किसी ग्राहक को ज़रूर देखा या सुना होगा जो बार-बार वही सवाल अलग-अलग तरीके से पूछता है। कभी-कभी तो लगता है कि मानो ये लोग ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के हॉटसीट पर बैठे हों! और बेचारे कर्मचारी सोचते रहते हैं—“भाई, मैंने तो पहले ही साफ़-साफ़ जवाब दे दिया, अब क्या करूँ?”
आज हम ऐसे ही मज़ेदार और कभी-कभी सिर पीट लेने वाले अनुभव की बात करेंगे, जिसमें ग्राहक और कर्मचारियों के बीच सवाल-जवाब का मज़ेदार खेल चलता रहता है। ज़रा सोचिए, होटल के रिसेप्शन पर बैठा एक कर्मचारी, और सामने फोन पर एक जिज्ञासु ग्राहक—शुरू हो गया शतरंज का खेल!