होटल में हॉकी टीमों का हमला: जब नियमों की कमी ने सबको परेशान कर दिया
भाई साहब, अगर आप कभी होटल या गेस्ट हाउस में काम कर चुके हैं, तो आपको पता होगा कि ग्रुप बुकिंग यानी सामूहिक बुकिंग कितनी सरदर्दी ला सकती है। ऊपर से अगर वो ग्रुप हॉकी टीम का हो, तो समझ लीजिए, जैसे बारातियों की फौज आ गई हो — बच्चे-दौड़, माता-पिता की फरमाइशें, और हर चीज़ का हल्ला। आज मैं आपको एक ऐसे ही होटल की कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जहाँ न नियम कायदे हैं, न कोई काम की तयशुदा लकीर — बस जैसे-तैसे होटल चल रहा है, और कर्मचारियों के बीच मनमुटाव अपनी चरम सीमा पर है।