जब ‘बैग वाले भैया’ को मेट्रो में खड़ा रहना पड़ा – एक छोटी सी बदला कहानी
क्या आपने कभी मेट्रो या लोकल ट्रेन में सफर करते हुए ऐसे यात्रियों को देखा है, जो अकेले ही तीन-तीन सीटों पर कब्जा जमाकर बैठ जाते हैं? ऊपर से उनकी बगल में बड़े-बड़े बैग, झोले या थैले भी ऐसे सजा देते हैं, मानो सीट पर उनका खानदानी हक हो! ऐसे में जब बाकी लोग खड़े-खड़े थक जाते हैं, तो मन ही मन हर कोई यही सोचता है – काश कोई इन्हें अच्छा सबक सिखाए। आज की हमारी कहानी कुछ ऐसी ही है, जिसमें एक सज्जन ने अपनी छोटी सी बदला-लीला से पूरे प्लेटफॉर्म का मूड बदल दिया।