होटल का ग्राहक और उसका ‘बाजार भाव’: जब सब्र का बांध टूट गया
होटल की रिसेप्शन का काउंटर… यहाँ हर दिन एक नई फिल्म चलती है! कोई मीठा बोलकर कमरा लेता है, कोई अपने फ्री अपग्रेड के लिए शुक्रगुज़ार रहता है, तो कोई—बस, सिर दर्द देने के लिए ही पैदा हुआ लगता है। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
जैसे हमारे मोहल्ले में एक ‘मामा’ होते हैं, जो हर चीज़ में मोलभाव किए बिना चैन नहीं लेते, वैसे ही एक ‘खास’ ग्राहक ने होटल स्टाफ की नाक में दम कर रखा है।