होटल में 'विशेष सदस्य' बनने की होड़: क्या वाकई रूम जादू से मिल जाता है?
अगर आप कभी होटल के रिसेप्शन पर खड़े हुए हों, तो आपने ज़रूर देखा होगा कि कुछ मेहमान खुद को 'बहुत खास' समझते हैं। जैसे ही रिसेप्शनिस्ट कहे, “अभी कोई खाली रूम नहीं है,” वैसे ही सामने वाला तुरंत बोल पड़ता है – “मैं तो गोल्ड/प्लैटिनम/डायमंड मेंबर हूं!” मानो उनकी सदस्यता कार्ड दिखाते ही छप्पर फाड़ के नया कमरा तैयार हो जाएगा, बाथरूम बन जाएगा या होटल के नियम बदल जाएंगे!
आज हम इसी पर बात करेंगे – उन 'विशेष सदस्यों' की, जिनका मानना है कि होटल की फ्रंट डेस्क पर उनका स्टेटस ही सुपरपावर है। और हां, इसमें शादी-ब्याह वाले, घोड़े पालने वाले और ‘अरे भाई, मैं तो स्पेशल हूं’ कहने वालों की भी भरमार है। तो आइए, जानें होटल वालों की ज़ुबानी, वो किस्से जो हर किसी के चेहरे पर मुस्कान ले आएंगे।