जब पड़ोसी ने नियमों का राग अलापा, तो खुद फँस गया जाल में!
कहते हैं पड़ोसी भगवान नहीं, मगर कभी-कभी शैतान भी कम नहीं होते! हर मोहल्ले, हर बिल्डिंग में एक ऐसा किरदार जरूर रहता है, जिसे दूसरों की ज़िंदगी में झाँकने की अलग ही आदत होती है। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है—जर्मनी के एक अपार्टमेंट में रहने वाले एक 'शग्गी' टाइप पड़ोसी की, जिसने "घर के नियम" का इतना ढोल पीटा कि आखिरकार खुद ही उसमें उलझ गया।