होटल रिसेप्शन पर 'मेहमान-नवाज़ी' की परीक्षा: जब कोच साहब बोले, 'मेरे पास समय है
कितनी बार ऐसा होता है कि हम अपने दफ्तर की आखिरी घड़ी गिन रहे होते हैं, और तभी कोई काम में डूबा-डूबा ग्राहक आ धमकता है? सोचिए, रातभर नींद पूरी न हुई हो, माथा भारी हो, और इसी हालत में कोई साहब अपने हक से कह दे—"मुझे अभी सब कुछ चाहिए, मैं इंतजार कर सकता हूं!" होटल के रिसेप्शन पर अक्सर ऐसी कहानियां बनती-बिगड़ती रहती हैं। आज हम एक ऐसी ही रोचक घटना पर चर्चा करेंगे, जो हर उस शख्स को छू जाएगी जिसने कभी ‘ग्राहक सेवा’ का काम किया हो या कभी ग्राहक बना हो।