90 साल की मम्मी और टेक्नोलॉजी: बेटा बना फैमिली आईटी सपोर्ट!
हमारे देश में जैसे ही किसी बुजुर्ग को मोबाइल या कंप्यूटर में कोई दिक्कत आती है, पूरा खानदान "आईटी एक्सपर्ट" बन जाता है। मम्मी, पापा, ताऊ, चाची — सबकी अलग-अलग सलाहें! लेकिन असली जिम्मेदारी अक्सर उस बच्चे की होती है, जिसे घरवाले टेक्नोलॉजी के मामले में सबसे समझदार मानते हैं।
आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है — एक 90 साल की मम्मी, जिनके मोबाइल में आई छोटी-सी परेशानी ने बेटे को एक बार फिर फैमिली टेक सपोर्ट की कुर्सी पर बिठा दिया। पढ़िए, कैसे एक साधारण-सी टेक समस्या ने पूरे घर को उलझा दिया और इसमें छिपा है हर भारतीय परिवार का आईटी सपोर्ट का अनोखा तड़का!
जब मम्मी बोलीं – "बेटा, मेरा पासवर्ड है क्या?"
सुबह-सुबह बेटे के मोबाइल पर मैसेज आया — "बेटा, तुम्हारे पास मेरा पासवर्ड है क्या? मुझे दुकान जाना है, फोन में कुछ दिक्कत है।" अब 90 साल की मम्मी टेक्नोलॉजी में ऐसी उलझ गईं कि बेटे की नींद ही उड़ गई!
बेटे ने फौरन कॉल किया, "मम्मी, क्या हुआ?" मम्मी बोलीं, "फोन में बहुत सारा सामान है, इसलिए चीजें मिल नहीं रही।" बेटा सोच में पड़ गया — मैसेज तो रोज करती हैं, फेसबुक भी चलता है, तो फिर क्या नहीं मिल रहा?
हमारे यहां भी तो ऐसा ही होता है — अक्सर मां-बाप को लगता है, फोन में "बहुत सारा सामान" है, इसलिए फोन धीरे चलने लगता है या कोई एप्लिकेशन दिखना बंद हो जाता है। मम्मी को फेसबुक मैसेंजर का नाम तक ठीक से याद नहीं, पर बेटे ने टेस्ट भेजा तो वो भी मिल गया। तो असल दिक्कत क्या थी, ये मम्मी खुद नहीं समझा पाईं!
टेक सपोर्ट के मज़ेदार किस्से: बॉलीवुड स्टाइल
यह कहानी सिर्फ एक घर की नहीं, पूरे भारत की हकीकत है। जैसे एक टिप्पणीकार ने लिखा, "मेरी दादी को भी यही समस्या आती है, पर वो पहले मेरी टेक वाली बुआ, पापा या किसी कजन के पास जाती हैं। सब मिलकर इतना घुमा-फिरा देते हैं कि असली समस्या क्या थी, सब भूल जाते हैं।"
और फिर जब असली टेक सपोर्ट के पास पहुंचती हैं, तो सवाल आता है — "फोन में डेवलपर सेटिंग्स कैसे चालू करें?" असल में तो बस ब्लूटूथ ऑन करना था, ताकि गाड़ी से कनेक्ट हो जाए। ये तो वही बात हो गई जैसे डॉक्टर के पास जाकर "मुझे दर्द है" कह देना, पर कहां दर्द है, कैसे हुआ, कुछ नहीं पता!
एक और मजेदार कमेंट में किसी ने लिखा, "आधा घंटा पूछताछ करने के बाद पता चला कि मम्मी ने आधे रिश्तेदारों का नंबर ही ब्लॉक कर रखा था, इसलिए कॉल नहीं आ रही थी!" ये तो वही हुआ — "खुद ही काट लिया, अब खुद ही जोड़ो।"
बुजुर्गों का अपना अंदाज और नई तकनीक का डर
हमारे यहां अक्सर बुजुर्ग स्मार्टफोन से डरते नहीं, बल्कि उसे अपने तरीके से अपनाते हैं। एक टिप्पणीकार ने लिखा — "मेरी मां 92 साल की हैं, हर दो हफ्ते में फोन लेकर आ जाती हैं — 'इसे ठीक कर दो!' गूगल पर सर्च भी करती हैं, पर ब्राउज़र क्या है, नहीं जानती।"
इसी तरह एक और पाठक ने सलाह दी — "अगर बार-बार दूर रहकर मदद करनी हो, तो फोन में रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल कर दो, ताकि कहीं से भी देख सको कि दिक्कत क्या है।"
पर यहां भी एक चेतावनी मिलती है — "अगर यूजर को पता चल गया कि सिस्टम में कोई आईटी पोर्टल है, तो वो छोटी-सी दिक्कत को बड़ा सिरदर्द बना देंगे!" यानी जितना समझाओ, उतना ही ज्यादा उलझ सकते हैं।
टेक सपोर्ट: सब्र का इम्तिहान और हंसी का मसाला
टेक्नोलॉजी पर बुजुर्गों की पकड़ चाहे जितनी कमजोर हो, उनका जज़्बा कम नहीं होता। एक कमेंट में पढ़ने को मिला, "कम से कम वो पूछती तो हैं, स्क्रीन पर कुछ भी बटन दबा देने की बजाय!"
बहुत बार, असली समस्या इतनी छोटी होती है कि हंसी आ जाती है — जैसे फोन साइलेंट मोड में चला गया, या वाई-फाई बंद हो गया, और मम्मी हर बार भूल जाती हैं वापस कैसे ऑन करना है। किसी ने तो यहां तक लिखा कि उनकी मां ने हर रिश्तेदार का कॉन्टैक्ट विडजेट बना रखा है, क्योंकि नंबर सर्च करना "बहुत मुश्किल" है!
निष्कर्ष: टेक्नोलॉजी और प्यार का संगम
आज की दुनिया में टेक्नोलॉजी और परिवार दोनों का तालमेल बहुत जरूरी है। मम्मी-पापा, दादी-नानी, सबको टेक्नोलॉजी से जुड़ना अच्छा लगता है, पर मुश्किलें भी आती हैं। ऐसे में हमें सब्र रखना चाहिए, और उनकी मासूम गलतियों पर मुस्कुराना चाहिए।
आपके घर में भी ऐसे किस्से हुए हैं? कभी मम्मी ने आपको रात को उठा दिया हो "फोन में कुछ दिख नहीं रहा", या पापा ने कंप्यूटर को "गूगल" कह दिया हो? कमेंट में जरूर बताइए — आपके मजेदार अनुभवों का हमें इंतजार रहेगा!
साथ ही, अगली बार जब घर के बुजुर्ग फोन लेकर आएं, तो याद रखिए — उनका प्यार और विश्वास ही असली टेक सपोर्ट है!
मूल रेडिट पोस्ट: Nonagenarian family tech support - Bless her heart!!